छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत पद्म विभूषण पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में सरकार नौ महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी। वहीं, विपक्ष ने कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा की प्रतीकात्मक तस्वीर।इस सत्र में सरकार नौ महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश करेगी, जबकि विपक्ष के आक्रामक रुख को देखते हुए सदन में हंगामे की संभावना है। सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष ने आक्रामक रुख अपनाया है। कांग्रेस विधायकों ने नवा रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त, किसानों की समस्याओं और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति भी तैयार की गई है। चर्चा है कि विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर सकता है।
अयोध्या राममंदिर चंदा पर गहमागहमी
सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने राममंदिर चंदा प्रकरण पर स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जिसे विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने स्वीकार नहीं किया। दोनों पक्ष नारेबाजी करते रहे। इससे पहले रविवार को नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत के रायपुर स्थित निवास पर कांग्रेस विधायक दल की मैराथन बैठक हुई, जिसमें सरकार के खिलाफ ”अविश्वास प्रस्ताव” लाने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस ने इस सत्र में सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरने की व्यापक रणनीति तैयार की है।
14 जुलाई को लाएंगे अविश्वास प्रस्ताव
महंत ने बताया कि कांग्रेस 14 जुलाई को विधानसभा में राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है और जनता असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने रेत माफिया के आतंक, नशे के कारोबार, शराब की समस्या और बिजली बिल में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों को सरकार की विफलता का प्रमाण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नकटी गांव में गरीबों पर हुए अत्याचार के मामले को भी स्थगन प्रस्ताव के जरिए प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कांग्रेस पर जनता का अविश्वास: केदार कश्यप
संसदीय कार्यमंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि असली अविश्वास तो जनता ने कांग्रेस के प्रति जताया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव, और फिर नगरीय निकाय व उपचुनावों में लगातार मिली हार यह दर्शाती है कि कांग्रेस अपना जनाधार खो चुकी है। कश्यप ने कांग्रेस के विधायकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे स्वयं यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि उनका यह अविश्वास प्रस्ताव वास्तव में किसके खिलाफ है। क्या यह प्रस्ताव कांग्रेस के भीतर मची आपसी खींचतान और कलह का परिणाम है? या फिर यह जनता की अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाने की हताशा है?

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